अयोध्या जिले के अमानीगंज विकास खंड में सौर ऊर्जा से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल को मजबूत करने के उद्देश्य से पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पीरे दला स्थित केला रेशा प्रदर्शन इकाई पर आयोजित हुआ, जहां महिलाओं को हरित उद्यमिता (Green Entrepreneurship) और सौर ऊर्जा आधारित तकनीकों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल (NRDC) और The Energy and Resources Institute के संयुक्त तत्वावधान में ओंकार सेवा संस्थान के सहयोग से किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य विषय था — “सौर प्रौद्योगिकी द्वारा जलवायु अनुकूलन एवं आजीविका सृजन”।
Climate Change से निपटने के लिए Solar Technology पर जोर
एनआरडीसी इंडिया के प्रतिनिधि राना पुजारी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम चक्र तेजी से बदल रहा है। बिना मौसम बारिश, अतिवृष्टि और सूखे जैसी समस्याएं किसानों की आय को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने लोगों से कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल ग्रामीण भारत में रोजगार और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए बेहद जरूरी है।
Solar Energy है स्थायी समाधान
टेरी के निदेशक Dr. P. K. Bhattacharya ने महिलाओं और किसानों से Solar Energy आधारित तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बढ़ते ईंधन संकट के बीच सौर ऊर्जा भविष्य का सबसे सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प है।
एनआरडीसी इंडिया के उत्तर प्रदेश प्रमुख Himanshu Gupta ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में Solar Technology के जरिए महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
Women Empowerment और Green Entrepreneurship पर फोकस
टेरी की फेलो Pallavi Singh ने महिलाओं को प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और हरित उद्यमिता के महत्व के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को सौर ऊर्जा उपकरणों के उपयोग, जलवायु अनुकूलन और छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू करने की तकनीकी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के तहत 40 महिलाओं को सुल्तानपुर जिले के डोभीयारा स्थित कलावती एग्री फार्म का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्होंने कृषि और सौर ऊर्जा आधारित मॉडल को करीब से समझा।
ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास
ओंकार सेवा संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Surya Kumar Tripathi ने कहा कि संस्था का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को सौर ऊर्जा और हरित उद्यमिता से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिमांशु उर्फ गौरी, उषा मौर्य, जनकल्ली, जालपा कुमारी, गुडंबा देवी, पूजा, अनीता, लता, वैष्णवी और नीलम सहित कुल 40 महिलाओं ने भाग लिया।
Green Livelihood के जरिए बदल रही गांवों की तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि सौर ऊर्जा से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है। इससे न केवल महिलाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

